चौथे इमाम ज़ैनुल आबेदीन की शहादत पर आज बड़ा घर दरियाबाद के मैदान मे होगा दहकते अंगारों पर मातम

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तहफ्फुज़े अज़ा सोसाईटी की ओर से माहे मोहर्रम की 25 (24 अगस्त) बुधवार को रात्रि 9 बजे पठनवल्ली दरियाबाद स्थित इमामबाड़ा नवाब बेगम बड़ा घर के बाहर मैदान मे दहकते हुए अंगारों पर मातम होगा।बहलोल ए हिन्द आफताबे निज़ामत जनाब नजीब इलाहाबादी के संचालन मे आस पास की लाईटों को बुझा कर मोमबत्ती की रौशनी व सुगन्धित लोबान की धूनी मे ताबूत इमाम ए सज्जाद और दो दर्जन से अधिक लहराते अलम के बीच मोमनीन इलाहाबाद मातम करते हुए नंगे पैर अंगारों पर चलेंगे। उम्मुल बनीन सोसाईटी के महासचिव सैय्यद मोहम्मद अस्करी के अनुसार देर रात मे होने वाले मातमी कार्यक्रम मे शहर के साथ दूर दराज़ से अक़ीदतमन्द शामिल होंगे।इमाम ए जुमा सैय्यद हसन रज़ा ज़ैदी की सदारत मे दिल्ली के प्रख्यात मज़हबी रहनुमा मौलाना सैय्यद नज़र मोहम्मद ज़ैनबी मजलिस को खेताब करेंगे।जेएनयू के स्कालर अनुराग कुमार खुरासानी की खुसूसी तकरीर होगी वहीं खतीब ए अहलेबैत अशरफ अब्बास खाँ की एखतेमामी तक़रीर होगी।तहफ्फुज़े अज़ा के सदस्यों व इलाहाबाद के मोमनीन व नौजवान तेज़ धार की छूरीयों से लैस ज़न्जीरों का मातम भी करेंगे।मशहूर शायर नायाब बलयावी खुसूसी नौहा पढ़ेंगे।चक ज़ीरो रोड स्थित इमामबाड़ा डीप्यूटी ज़ाहिद हुसैन मे बुधवार को दिन मे 2 बजे यौमे सज्जाद मे अन्जुमन इमामिया चक द्वारा ज़न्जीरों का मातम होगा।सोज़ख्वानी फैज़ान आब्दी पेशख्वानी नायाब बलयावी और खिताबत मौलाना आमिरुर रिज़वी की होगी।खुसूसी नौहाख्वान नय्यर अज़मी का होगा।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया और अन्जुमन शब्बीरिया नौहा और मातम का नज़राना पेश करेगी।वहीं दरियाबाद मे मजलिसे अज़ा का आयोजन मेराज हैदर की ओर से इमामबाड़ा इरतेज़ा हुसैन मे बुधवार को रात्रि 8 बजे होगा।रेयाज़ मिर्ज़ा व शुजा मिर्ज़ा सोज़ख्वानी के फराएज़ अन्जाम देंगे।डॉ अशरफ अब्बास मजलिस को खिताब करेंगे और अन्जुमन हुसैनिया क़दीम नौहा और मातम का नज़राना पेश करेगी।मजलिस का सीधा लाईव प्रसारण अज़ादारी डॉट कॉम पर जनाब फैज़याब हैदर द्वारा होगा।

अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया ने पढ़ा नौहा तो अक़ीदतमन्दों के छलक पड़े आँसू

रानीमण्डी मे राजू भाई के इमामबाड़़े पर मजलिस का आयोजन किया घया जिसमे इमामे सज्जाद चौथे इमाम ज़ैनुल आबेदीन का ताबूत निकाला गया।मौलाना ने करबला मे सभी जाँनिसारों के राहे हक़ मे क़ुरबान होने के बाद सैदानियों पर और इमाम सज्जाद पर यज़ीदी लश्कर द्वारा ढ़ाए गए ज़ुल्म की दास्ताँ सुनाई तो हर आँख अश्कबार हो गई।इमाम ए सज्जाद जो बीमार थे उन्हे हाँथों मे हथकड़ी पैरों मे बेड़ी और गले मे खारदार तौक़ पिन्हा कृ कशाँ कशाँ फिराया गया।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के नौहाख्वानों ने पुरदर्द नौहा पढ़ा तो हर एक अक़ीदतमन्द रोने लगा।

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