जिस पत्नी की हत्या के लिए दोस्त के साथ काटी जेल, 7 साल बाद उसे ढूंढ निकाला जिंदा

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मथुरा।उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में हैरतअंगेज मामला सामने आया है।जिस पत्नी की हत्या के मामले में पति और उसका दोस्त 18 महीने सलाखों के पीछे रहा वो पत्नी जीवित निकली।जेल से बाहर निकलने के बाद पति और उसके दोस्त ने महिला को राजस्थान के दौसा जिले में ढूंढ निकाला।पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया।महिला के जीवित मिलने के बाद अब पुलिस की विवेचना पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।पिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हे जिन्होंने अपनी बेटी की जगह दूसरे की बेटी की पहचान कर ली। सवाल ये भी खड़ा हो गया है कि वह शव किसका था जिसकी पहचान आरती के रूप में हुई थी।

मामला 2015 का है।जालौन के रहने वाले सूरज प्रसाद गुप्ता अपनी पत्नी,बेटी आरती और बेटे के साथ वृंदावन आकर रहने लगे।आरती की मानसिक हालत ठीक न होने पर माता-पिता इलाज के लिए आरती को बालाजी ले गए,जहां आरती की मुलाकात सोनू से हुई।सोनू और आरती के नैन टकराए और प्यार परवान चढ़ा।इसके बाद आरती घर से निकल गई। आरती ने बालाजी के रहने वाले सोनू से बांदीकुई कोर्ट में विवाह कर लिया।विवाह के तीन दिन बाद आरती ने सोनू के सामने ऐसी शर्त रखी जिसे होटल पर काम करने वाले सोनू के लिए इस जन्म में मुश्किल था।आरती ने सोनू से 50 हजार रुपए,जमीन उसके नाम करने और गाड़ी की डिमांड कर दी। मांगें पूरी न होने पर आरती घर से लापता हो गई।

पिता ने दर्ज कराई थी गुमशुदगी की रिपोर्ट

सोनू के पास से गायब होने से पहले आरती पाच सितंबर 2015 को अचानक अपने पिता के घर से गायब हुई थी।पिता ने वृंदावन थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। गुमशुदगी के आधार पर पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई थी।इसी बीच मार्च 2016 में थाना मगोर्रा क्षेत्र में एक महिला का शव नहर में मिला था।शव मिलने की जानकारी मिलने पर आरती के पिता मगोर्रा थाना पहुंचे और फोटो देखकर मृत मिली महिला की पहचान अपनी बेटी आरती के रुप में की। पिता द्वारा पहचान करने पर पुलिस ने पहले से दर्ज कराई गई एफआईआर में हत्या की धारा बढ़ाते हुए सोनू और उसके दोस्त गोपाल को गिरफ्तार कर लिया।आरती की हत्या के आरोप में उसका पति सोनू और उसका मित्र गोपाल डेढ़ साल तक जेल काटी।डेढ़ साल तक जेल में रहने के बाद दोनों की जमानत हो गई।जमानत के बाद सोनू और गोपाल ने आरती की तलाश की और हत्या के आरोप में जेल काट चुके पति और उसके दोस्त को अपने लक्ष्य में सफलता भी मिली।

कभी बना सब्जी वाला तो कभी चलाई ऊंट गाड़ी

वृंदावन कोतवाली पहुंचे सोनू और गोपाल ने बताया कि उन्होंने आरती की हत्या नहीं की थी।विश्वास था कि वह मरी नहीं है।इसीलिए आरती की तलाश कर रहे थे।सोनू ने बताया कि वह आरती की तलाश के लिए कभी सब्जी वाला तो कभी ऊंट गाड़ी चलाने वाला बनकर बालाजी के आसपास के गांव में तलाश करता था।इसके बाद जब पता चला कि आरती विशाला गांव में है तो फिर इंदिरा आवास दिलाने के बहाने कागज लिए और खुलासा हो गया।

वृंदावन पुलिस ने किया था टॉर्चर

जिंदा मिली आरती की फर्जी हत्या के मामले में जेल जा चुके सोनू और गोपाल ने बताया कि 2016 में जब वृंदावन पुलिस उनको गिरफ्तार करके लाई तो पुलिस ने बहुत टॉर्चर किया। सोनू के नाखून प्लास से उखाड़े गए और धमकी दी गई कि अगर हत्या करने की बात नहीं कबूली तो एनकाउंटर कर देंगे। पुलिस के टॉर्चर से घबरा कर दोनों ने हत्या करना कबूल कर लिया था। सोनू और गोपाल ने बताया कि उनको उस वारदात की सजा मिली जो उन्होंने की ही नहीं थी।इस मामले की सीबीआई जांच हो और उन पुलिस कर्मियों को सजा मिले जिन्होंने सही जांच न कर निर्दोष जेल भेज दिया।

एसएसपी ने कही ये बात

डेढ़ साल जेल में रहने के बाद हाईकोर्ट से मिली जमानत और उसके बाद लगातार पत्नी आरती की तलाश कर रहे सोनू के द्वारा कागजों में मरी आरती को राजस्थान के गांव विशाला में जिंदा पहचान कर लेने पर उसने इसकी सूचना स्थानीय पुलिस के साथ-साथ वृंदावन पुलिस को दी।पुलिस ने दोनों की सूचना पर कार्रवाई करते हुए आरती को जिंदा बरामद कर लिया और अदालत में पेश किया।एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि महिला की पहचान उसके माता पिता ने कर ली है।पहचान के बाद महिला को अदालत में पेश किया गया है।पुलिस अब महिला का डीएनए कराएगी ताकि पिछली बार की तरह कोई गलती न हो।उधर पुलिस ने आरती की हत्या के आरोप में जेल गए सोनू और उसके मित्र को निर्दोष पाए जाने पर उन्हें दोष मुक्त कराने की विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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