नवजात मृत्यु दर में कमी लाने की राज्य स्तरीय कार्ययोजना तैयार

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लखनऊः नवजात शिशुओं को सुरक्षित रखने और नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए स्टेट न्यू बार्न एक्शन प्लान तैयार किये जाने के उद्देश्य से जनपद बहराईच में शुक्रवार को एक राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं युनिसेफ के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में बाल स्वास्थ्य से जुडे़ विशेषज्ञों एवं बाल रोग चिकित्सकों ने उत्तर प्रदेश नवजात कार्ययोजना तैयार किये जाने हेतु अपने विचार रखे। कार्यशाला में जनपद बहराईच के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 सुशील कुमार, महाप्रबंधक बाल स्वास्थ्य, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उ0प्र0, डा0 वेद प्रकाश, हेल्थ स्पेशलिस्ट युनिसेफ, डा0 कनुप्रिया सिंघल, हेल्थ स्पेशलिस्ट, उ0प्र0 तकनीकी सहयोग इकाई (आई.हैट.) डा0 रेनू श्रीवास्तव गोयल आदि विशेष रूप से सम्मिलित रहे।
जनपद बहराईच के लेसर रिजॉर्ट में आयोजित कार्यशाला का शुभारम्भ करते हुए महाप्रबंधक बाल स्वास्थ्य, डा0 वेद प्रकाश ने बताया कि विगत कुछ वर्षो में नवजात मृत्यु दर कम हुई है किन्तु इसे और कम किये जाने की आवश्यकता है। स्टेट न्यू बार्न एक्शन प्लान का मुख्य उद्देश्य ही नवजात मृत्यु दर को कम करना है। भारत सरकार के निर्देश पर इसकी कार्ययोजना को तैयार किये जाने के लिए देश के चार राज्यों उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, मेघालय और जम्मू कश्मीर का चयन किया गया है। इन राज्यों के आठ जनपदों में बारीकी से विश्लेषण किया गया तथा सितम्बर 2022 में राष्ट्रीय स्तर पर अंतर विश्लेषण किया गया। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश से एक महात्वाकांक्षी जनपद बहाराईच तथा दूसरे जनपद प्रयागराज में कार्यशालायें आयोजित कर नवजात शिशु कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाये जाने की आज शुरूआत की गई है।
आयोजित कार्यशाला में नवजात मृत्यु दर को कम करने हेतु स्वास्थ्य संचार (आई.ई.सी./बी.सी.सी. गतिविधियों) के साथ समाज के विभिन्न वर्गो, जनप्रतिनिधियों, कर्मचारियों तथा विभिन्न समुदायों को सम्मिलित कर उनके विचारों को कार्ययोजना में समाहित करना है। बिल एण्ड मिलिण्डा गेट्स फाउण्डेशन (बी.एम.जी.एफ.) के विशेषज्ञ डा0 विकास ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में नवजात मृत्यु दर अलग-अलग है। किसी जनपद में 40 है तो किसी जनपद में लगभग 22 है। इसके अलावा ब्लाक स्तर पर भी नवजात मृत्यु दर में विषमतायें हैं। जनपदस्तरीय इन्ही चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एक रणनीति तैयार किये जाने की आवश्यकता है, जिससे नवजात मृत्यु दर को कम से कम किये जाने के लिए कार्ययोजना को तैयार किया जा सके। डा0 कनुप्रिया सिंघल ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए बताया कि नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रथम तिमाही में ही गर्भवती महिलाओं को चिन्हित करते हुए उसकी प्रसवपूर्व जांच करने का आवश्यकता है, खतरे के लक्षणों वाली महिलाओं को उचित संदर्भन एवं उपचार करने में आशा, ए.एन.एम., स्टाफ नर्स एवं राज्यस्तरीय अधिकारियों आदि सभी को समुचित प्रयास करने की आवश्यकता है।
उन्हांने बताया कि आशा कार्यकत्री के गृह भ्रमण के दौरान गर्भवती महिला एवं उसकी सास के अतिरिक्त महिला के पति से भी आशा को सम्पर्क करते हुए नवजात शिशु की सुरक्षा के बारे में जागरूक करना चाहिये। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 सुशील कुमार द्वारा इस पहल की सराहना करते हुए जनपद द्वारा नवजात मृत्यु दर को कम करने का संकल्प लेने एवं कार्यशाला में उपस्थित जनपद एवं ब्लाक स्तर के अधिकारियों को एक्शन प्लान बनाने हेतु सराहा गया। कार्यशाला के दौरान विस्तृत योजना पर मंथन किया गया जिसका समन्वय डा0 रेनू श्रीवास्तव गोयल द्वारा किया गया। इसके अतिरिक्त अन्य जनपदों में भी कार्यशालाओं को आयोजित करते हुए राज्य स्तर पर नवजात मृत्यु दर में कमी लाने की नीति का विकास किया जायेगा। कार्यशाला का संचालन डा0 प्रमित के द्वारा किया गया।

न्यूज़ ऑफ इंडिया (एजेन्सी)

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