नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेशन में जिला चिकित्सालय श्रेणी में प्रदेश को पूरे राष्ट्र में ‘प्रथम‘ स्थान

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न्यूज़ ऑफ इंडिया ( एजेंसी )


लखनऊ: प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि ‘नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैण्डर्ड‘ के अन्तर्गत नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेशन के तहत जिला चिकित्सालय श्रेणी में प्रदेश को पूरे राष्ट्र में ‘प्रथम‘ स्थान प्राप्त करने का गौरव प्राप्त हुआ है। उन्होने बताया कि अब तक प्रदेश के 46 जनपदों की 79 चिकित्सा इकाईयाँ  छफ। सर्टिफिकेशन प्राप्त कर चुकी हैं जिसमें 42 जनपद स्तरीय, 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा 21 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सम्मिलित हैं। साथ ही जनपद स्तरीय चिकित्सालय श्रेणी में 35 तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र श्रेणी में 15 चिकित्सा इकाईयाँ ‘लक्ष्य‘ सर्टिफिकेशन (लेबर रूम एवं आँपरेशन थियेटर) प्राप्त कर चुकी है।
श्री पाठक ने प्रदेश की जनता को आश्वस्त किया कि आगामी समय में अधिक से अधिक चिकित्सा इकाईयों के सर्टिफिकेशन हेतु रणनीति तैयार की जायेगी जिससे कि प्रदेश की जनता गुणवत्तापरक उपचार ‘जीरो पाँकेट खर्च‘ के रूप में हो सके। चूकि गम्भीर मरीजों का इलाज जनपद स्तरीय चिकित्सा इकाईयों में ही संभव है इस कारण से जनपद स्तरीय चिकित्सा इकाईयों में क्वालिटी पैरामीटर्स को पूर्ण करने की प्राथमिकता दी गयी जिसके फलस्वरूप जनपद स्तरीय चिकित्सालय श्रेणी में प्रदेश को देश में प्रथम स्थान का गौरव प्राप्त हुआ है।    
ब्रजेश पाठक ने बताया कि चिकित्सा इकाईयों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैण्डर्ड‘ के अन्तर्गत नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेशन वर्ष 2013 में प्रारम्भ किया गया। उक्त छफ। सर्टिफिकेशन हेतु तीन चरणों में असेसमेंट निर्धारित चेकलिस्ट के माध्यम से किया जाता हैै।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि अन्तिम चरण का असेसमेंट भारत सरकार द्वारा नामित राष्ट्रीय स्तर पर इम्पैनल्ड एक्सटर्नल असेसर्स द्वारा सघन रूप से किया जाता है। चिकित्सा इकाईयों में मातृ एवं बाल स्वास्थ्य में सुधार एवं प्रमाणीकरण हेतु ‘लक्ष्य‘ सर्टिफिकेशन तथा ‘मुस्कान‘ सर्टिफिकेशन कार्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है।
श्री पाठक ने बताया कि सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में गतिशीलता लाने हेतु बेसलाइन-असेसमेंट कराने के उपरान्त चिकित्सा इकाईयों में क्वालिटी टीम का गठन, प्रशिक्षण तथा वर्चुअल माध्यम से नियमित रूप से गैप क्लोजर की प्रगति समीक्षा की। उन्होनें बताया कि सर्टिफाइड चिकित्सा इकाईयों में मरीजों एवं तीमरदारों की संन्तुष्टि का स्तर बढ़ा है तथा मरीजो का विश्वास सरकारी चिकित्सालयों के प्रति सकारात्मक हुआ है।

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