पीएम मोदी ने रामलला का दर्शन और पूजा-अर्चना की, अपने संबोधन में कही बड़ी बातें*

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अयोध्या।मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या दीपावली से एक दिन पहले राममय हो गई है।दीपोत्सव की रोशनी चारों ओर बिखरी हुई है।रामकथा पार्क राजभवन की तरह सजा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भव्य दीपोत्सव आयोजन में शामिल होने रामनगरी अयोध्या पहुंचे।पीएम मोदी ने रामलला का दर्शन किया और आशीर्वाद लिया।रामलला के दर्शन के बाद पीएम मोदी ने राम मंदिर के नक्शे को देखा और जानकारी ली और निर्माण कार्यों का भी निरीक्षण किया। इसके बाद पीएम मोदी ने महर्षि वशिष्ठ की भूमिका में श्रीराम का राजतिलक कर आरती उतारी और सभा को संबोधित किया।


पीएम मोदी ने कहा कि श्री रामलला के दर्शन और उसके बाद राजा राम का अभिषेक ये सौभाग्य रामजी की कृपा से ही मिलता है। उन्होंने कहा कि जब श्रीराम का अभिषेक होता है तो हमारे भीतर भगवान राम के आदर्श, मूल्य और दृढ़ हो जाते हैं। आजादी के अमृतकाल में भगवान राम जैसी संकल्प शक्ति, देश को नई ऊंचाई पर ले जाएगी। भगवान राम ने अपने वचन में, अपने विचारों में, अपने शासन में, अपने प्रशासन में जिन मूल्यों को गढ़ा, वो सबका साथ-सबका विकास की प्रेरणा हैं और सबका विश्वास-सबका प्रयास का आधार हैं।

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पीएम मोदी ने कहा कि एक समय वो भी था जब हमारे ही देश में श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाए जाते थे। इसका नतीजा यह हुआ कि हमारे देश के धार्मिक स्थलों का विकास पीछे छूट गया। उन्होंने कहा कि पिछले आठ सालो में हमने धार्मिक स्थानों के विकास के काम को आगे रखा है। भगवान श्रीराम का जीवन बताता है कि हमारे अधिकार हमारे कर्तव्य से स्वयंसिद्घ हो जाते हैं। श्रीराम ने अपने जीवन में कर्तव्यों को सर्वाधिक जोर दिया। उन्होंने वन में रहकर साधुओं की संगत की।

पीएम मोदी ने रामनगरी के वासियों से कहा कि राम मंदिर के निर्माण के साथ ही यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ जाएगी।उन्होंने कहा कि ऐसे में अयोध्या स्वच्छ और यहां के लोगों का व्यवहार अच्छा हो। यह यहां के लोगों को तय करना है।कितना अच्छा हो कि अयोध्या के नागरिकों का व्यवहार भी अपने आप में मानक बने।

पीएम मोदी ने कहा कि भगवान राम किसी को पीछे नहीं छोड़ते, भगवान राम कर्तव्य-भावना से मुख नहीं मोड़ते। इसलिए भगवान राम भारत की उस भावना के प्रतीक हैं, जो मानती है कि हमारे अधिकार हमारे कर्तव्यों से स्वयं सिद्ध हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहे जाते हैं। मर्यादा मान रखना भी सिखाती है और मान देना भी और मर्यादा जिस बोध की आग्रह होती है, वो बोध कर्तव्य ही है।

पीएम मोदी ने कहा कि लाल किले से मैंने सभी देशवासियों से पंच प्राणों को आत्मसात करने का आह्वान किया है। इन पंच प्रांणों की ऊर्जा जिस एक तत्व से जुड़ी है, वो है भारत के नागरिकों का कर्तव्य। उन्होंने कहा कि आज अयोध्या नगरी में दीपोत्सव के इस पावन अवसर पर हमें अपने इस संकल्प को दोहराना है और भगवान राम से सीखना है।

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