प्रयागराज के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में नहीं है आयुर्वेदिक दवाओं का स्टॉक

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प्रयागराज।
कोरोना काल के दौरान जहां लोगों का विश्वास अंग्रेजी दवाओं से घटकर आयुर्वेदिक दवाओं की तरफ बढ़ा तो वहीं शासन द्वारा संचालित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में इस समय दवाओं का अभाव है, और आयुर्वेदिक अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों को अब आयुर्वेदिक दवाओं की जगह उन्हें आश्वासन की घुट्टी देकर उनके मर्ज को ठीक किया जा रहा है।
अगर देखा जाए तो कौंधियारा क्षेत्र के मवैया में खुले राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के साथ-साथ जसरा भीटा में खुले आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में जहां आयुर्वेदिक दवाओं का स्टॉक समाप्त होने के बाद अब वहां पर नियुक्त चिकित्सक अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को उनकी बीमारी के हिसाब से आयुर्वेदिक दवाओं को दे पाने में असमर्थता जाहिर कर रहे हैं। जहां मवैया आयुर्वेदिक चिकित्सालय में दूरदराज से जब लोग अपना इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं तो वहां पर मौजूद चिकित्सक दवा न होने की बात कह कर उन मरीजों से अपनी असमर्थता जाहिर करते हैं।
इस संदर्भ में जब जिला आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर शारदा प्रसाद से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पूरे जनपद के ही आयुर्वेदिक चिकित्सालय में दवाओं के स्टाक की कमी है और जल्द ही सभी आयुर्वेदिक अस्पतालों में दवाओं का पर्याप्त स्टाक उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन कब भेजा जाएगा यह स्पष्ट रूप से उनके द्वारा भी नहीं बताया गया। वहीं उन्होंने यह भी बताया कि दवाओं का ऑर्डर दिया गया है और उन दवाओं की आपूर्ति होने के बाद राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में क्षमता के अनुसार दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। लेकिन अस्पताल में पहुंचने वाले बीमार मरीजों को दवाएं न मिलने के कारण हो रही समस्याओं के बारे में वह बोलने से कतराते रहे।
अब सोचने वाली बात यह है कि राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में यदि दवाओं का स्टॉक खत्म है तो फिर मरीजों को इन आयुर्वेदिक चिकित्सालय में इलाज कैसे किया जाएं,यह सोचकर चिकित्सक भी काफी परेशान है।
वहीं राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के कुछ चिकित्सकों ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कोविड-19 के बाद से जहां लोग आयुर्वेदिक दवाओं पर ज्यादा विश्वास करके जटिल से जटिल बीमारियों का इलाज वह आयुर्वेद के माध्यम से ही करना चाह रहे हैं। वही अस्पतालों में दवाओं का स्टॉक खत्म होने के बाद अस्पताल में इलाज कराने के लिए पहुंचने वाले मरीजों को मजबूरी में बाहर से दवा लेने के लिए पर्चा लिखाना पढ़ रहा है।
वही आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में पहुंचने वाले कुछ मरीज ऐसे भी हैं जो बाहर से महंगी आयुर्वेदिक दवाओं को ले पाने में सक्षम नहीं हैं।

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