प्रयागराज में आस्था समिति द्वारा “लोक रंग बहार” का आयोजन, लोक कलाकारों ने बिखेरी सांस्कृतिक छटा

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प्रयागराज: प्रयाग की नव सांस्कृतिक चेतना को लोक कलाकारों से दीक्षित कराने का संकल्प सिद्ध करने के उद्देश्य से सांस्कृतिक संस्था “आस्था समिति” द्वारा दो दिवसीय “लोक रंग बहार” का उद्घाटन आज उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में लोक कलाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ हुआ
“आस्था समिति” द्वारा आयोजित “लोक रंग बहार” आयोजन के पहले दिन सांस्कृतिक केंद्र का प्रेक्षागृह लोक संगीत की शानदार प्रस्तुतियों से गुंजायमान हो गया, जिसमें युवा कलाकारों ने अपनी प्रभावपूर्ण प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया


कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रिया सिंह के निर्देशन में प्रस्तुत भावपूर्ण युगल नृत्य गणेश वंदना से हुई, तत्पश्चात सुप्रिया सिंह एवं साथी कलाकारों ने उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध डेढ़िया नृत्य प्रस्तुत करके सबको मंत्रमुग्ध कर दिया l गणेश वंदना में अनुश्री दुबे एवं वंदना श्री ने तथा डेढ़िया नृत्य में रंगोली तिवारी, प्राची यादव, इशिता सेन ,पूजा बिष्ट, अनुश्री दुबे, सौम्या चंद्रा, निधि सिंह, मधुरिमा श्री एवं अंशिका चतुर्वेदी शामिल रही l लोकगीत के क्रम में सावन मास में गाए जाने वाली कजरी “बरसो बरसो रे सवनवा मोर सजनवा अइले ना” तथा “सावन झरी लागी रे धीरे-धीरे” को प्रियंका चौहान ने अपनी सुमधुर आवाज में प्रस्तुत किया l तत्पश्चात रंजना त्रिपाठी ने एक और कजरी “विंध्याचल धाम गंगा तिरवा की देवी विंध्यवासिनी के डेरवा” तथा नकटा “मैं जालिम चोर बजनी बिछिया लाई” सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी l तत्पश्चात ज्योति आनंद ने सावन सावन महीने की नजाकत को समझते हुए वर्षा गीत “रिमझिम पड़त फुहार गगन री घेरी बदरिया सावन में” तथा कीर्ति चौधरी ने झूला गीत मोरे गउवां के माटी सुनार लागे को सुमधुर आवाजों में प्रस्तुत कर के लोकरंग बहार की पहली शाम को गायिकाओं एवं नृत्यांगनाओ ने यादगार बना दिया l लोक नृत्यों की कड़ी में “कैसे खेले जइबू सावन में कजरिया बदरिया घेरी आई ननदी” , जुग जुग जियसु ललनवा भवनवा के भाग जागे हो” तथा राजस्थानी कालबेलिया नृत्य “काल्यो कूद पड्यो मेले में” जैसे गीतों पर मनोहारी नृत्यों की प्रस्तुति हुई l
लोक संगीत का आयोजन सावन मास में होने से उसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है, आयोजन में सावन मास में गाए जाने वाली कजरी और नृत्य की धूम रही l लोकगीतों के क्रम में ही रागिनी चंद्रा ने “पानी बरसे पिया संग में लियाय चल छतवा लगाए चल ना” तथा “झूलनी टूटल पिया कि सेजिया बैठी मन मारे गुजरिया ना” सुनाकर वातावरण को रसमय बना दिया , लोकगीतों की अंतिम प्रस्तुति में मीना मल्होत्रा एवं स्नेहा महेंद्र ने युगल स्वरों में “आपन देखके खालीहनवा मोरा जियरा जुड़ाई” तथा”हमके चुनरी ले आई द लहरदार पिया” सुनाकर वाहवाही लूटी l संगत कलाकारों सौंदर्य सिंह हारमोनियम ,आशुतोष गुप्ता तबला, राजा भट्ट ढोलक ,दिलीप कुमार बैंजो एवं अरुण कुमार ऑक्टोपैड पैड ने अपने-अपने वाद्य यंत्रों के माध्यम से कार्यक्रम में जान डाल दी


कार्यक्रम के सम्मानित अतिथियों में आकाशवाणी और दूरदर्शन के निदेशक लोकेश कुमार शुक्ल, वरिष्ठ लोकनाट्यविद अतुल यदुवंशी, प्रधानाचार्य रानी रेवती देवी बांके बिहारी पांडे, वरिष्ठ चित्रकार एवं पत्रकार अजामिल ब्यास, कल्पना सहाय ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज के दौर की बदलती मान्यताओं को अगर इस प्रकार के आयोजनों से जोड़ा जाए तो निश्चित ही अपने गौरव की साख को सदियों तक कायम रख सकेंगे, आज हम अपने मूल संस्कृति से विमुख होते जा रहे हैं अगर इसी निष्ठा और साधना के साथ लोक कला के आयोजन होते रहे तो हम अपनी मूल संस्कृति को पुनर्स्थापित कर सकते हैं l
संस्था के कोषाध्यक्ष एवं आयोजन व्यवस्थापक पंकज गौड़ ने दो दिवसीय कार्यक्रम का विवरण प्रस्तुत किया, सेट परिकल्पना एवं निर्माण कुंवर अमरेंदु सिंह की थी l संस्था की ओर से अतिथियों का स्वागत राखी, विद्यारंजन आकांक्षा देवी ,अल्वीना, रमेश चंद्र, आरिश, आसी, आंजनेय गुप्ता, रेखा गुप्ता, मंजुला सक्सेना, कार्तिकेय गुप्ता एवं अक्षिता गुप्ता ने किया l प्रस्तुति परिकल्पना जमील अहमद की थी, धन्यवाद ज्ञापन संस्था के महासचिव गायक मनोज गुप्ता ने किया जबकि कार्यक्रम का कुशल एवं सफल संचालन प्रख्यात कवि शैलेश गौतम ने किया l

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