प्रयागराज में मानसून शुरू, 60 स्थान बने डेंगू के संभावित हॉट स्पॉट जाने डेंगू से बचने के उपाय

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• डेंगू से बचाव के लिए जागरूकता ही सुरक्षा
• इलाज में मनमानी वसूली पर रहेगी नजर
• मच्छरदानी का प्रयोग करें
• आस-पास पानी न एकत्र होने दें

प्रयागराज 22 जुलाई 2022: सावधान रहें, मानसून शुरू हो गया है। इससे जलजनित बीमारियां डेंगू व मलेरिया के फैलने की आशंका बढ़ गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डेंगू व मलेरिया से बचाव के लिए स्वछता सबसे बेहतर उपाय है। स्वास्थ्य विभाग की टीम एंटी लार्वा एक्टिविटी अभियान चलाने के साथ-साथ प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को मलेरिया-डेंगू के प्रभाव व बचाव के विषय में जागरूक कर कर रही है।

तैयारी पूरी, जांच व इलाज निःशुल्क
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ॰ आनंद सिंह ने कहा कि “जिले में डेंगू का अभी कोई केस नहीं है। पर मानसून की शुरुवात डेंगू की शुरुवात मानी जाती है। इसलिए विभाग सचेत है, डेंगू एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए कार्य किया जा रहा है। जनपद के सभी सामुदायिक एवं अर्बन के प्राथमिक स्वास्थ्य इकाइयों पर फीवर हेल्प डेस्क की बनाया गया है। जहां मलेरिया व डेंगू की जांच व इलाज निःशुल्क है। सभी आशा एवं आंगनबाडी कार्यकर्ता घर घर जा जाकर लोंगो को हाईजीन के बारे में जागरूक कर रहीं हैं। डेंगू मरीजों के इलाज के लिए जनपद के शहरी क्षेत्र में इलाज की व्यवस्था के अंतर्गत मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय में 25 बेड व स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय में 25 बेड व बेली अस्पताल में 25 बेड आरक्षित किए गए हैं। एलाइजा टेस्ट के बाद ही डेंगू की पहचान होती है। डेंगू की जांच के लिए एलाइजा जांच मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायलॉजी विभाग में उपलब्ध है। जहां किट पर्याप्त संख्या में उपलब्ध है।

शहर में कुल 60 स्थान बने हॉट स्पॉट क्षेत्र
बीते डेंगू केस व विभाग के सर्वे के मुताबित जनपद के शहरी क्षेत्र में मुख्य रूप से कुल 60 स्थान चिन्हित किए गए हैं। जिला अधिकारी के निर्देशानुसार इन क्षेत्रों में साफ-सफाई व एंटीलार्वा का छिड़काव किया जा रहा है। इनमें छोटा बघाड़ा में प्लॉट के सभी बेसमेंट, शिवकुटी थाने का पीछे वाला नाला, सलोरी में अमिताभ बच्चन पुल का नाला, राजापुर में उचवागढ़ी के नीचे वाला क्षेत्र, मेडिकल कालेज में ब्वाय्ज हॉस्टल के सामने वाली नालियाँ, सुलेम सराय में शेरवानी फैक्ट्री के पीछे का नाला, रामबाग बस स्टेशन के पास का क्षेत्र व मलिन बस्ती, लूकरगंज में सीपीडबल्यू के पास वाली नालियाँ, बेनीगंज की मलिन बस्ती का सम्पूर्ण क्षेत्र, कालिंदीपुरम काशीराम कॉलोनी का क्षेत्र, न्यू बैहराना में सुंदरम गेस्ट हाउस के पीछे का क्षेत्र, कीटगंज में मलिन बस्ती का क्षेत्र, पूरादलेल का मलिन बस्ती क्षेत्र,पूरा पडाइन आलोपिबाग मलिन बस्ती क्षेत्र, नैनी में पीएसी कालोनी और आज़ाद नगर, झूंसी पुलिया के नीचे का क्षेत्र, दारगंज प्रयागघाट स्टेशन के पास का क्षेत्र। सिविल लाइंस महिला थाना क्षत्र,रेलवे कॉलोनी व अन्य स्थान हॉट स्पॉट क्षेत्र के तौर पर चिन्हित किए गए हैं।

इलाज में मनमानी वसूली पर रहेगी नजर
हर किसी को इलाज मिल सके व लोगो को ससमय बचाया जा सके इसके लिए जिला अधिकारी के निर्देशन में सभी निजी नर्सिंग होम संचालकों को डेंगू के इलाज के लिए सुविधाएं बढ़ाने को कहा गया है। उन्हें आदेशित किया गया है कि डेंगू के इलाज में मरीजों से मनमानी वसूली की शिकायत मिलने पर शासन अस्पताल संचालक पर कार्यवाही करने के लिए प्रतिबद्ध होगा। किसी प्रकार के सुझाव व शिकायत के लिए मरीज व उनके परिजन मुख्य चिकित्साधिकारी के मो0 नं0 9044044040 तथा जिला मलेरिया अधिकारी मो0 नं0 7007631725 पर जानकारी दे सकते है।

डेंगू से बचाव की कोई वैक्सीन नहीं, बचाव ही सुरक्षा
डॉ॰ आनंद ने बताया कि ‘एडीज मच्छर डेंगू रोग का वाहक है जो दिन में काटता है। मच्छर डेंगू मरीज को काटने के बाद अगर स्वस्थ मनुष्य को काटता है तो उसे भी संक्रमित कर देता है। डेंगू से बचाव की कोई वैक्सीन नहीं है। मलेरिया का मच्छर सामान्यतः शाम और सुबह के बीच काटता है। अगर किसी स्वस्थ व्यक्ति को मलेरिया का संक्रमित मच्छर काटता है तो वह स्वयं तो संक्रमित होगा ही, दूसरे को भी संक्रमित कर सकता है। इसलिए मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में जाने से बचें।

डेंगू मलेरिया के मुख्य लक्षण
मलेरिया – ठंड के साथ तेज बुखार जो 103-104 तक जा सकता है। यह बुखार बार-बार चढ़ता-उतरता रहता है। इसके अलावा सिर दर्द और दो बार से अधिक उल्टी भी इसके लक्षण हैं। डेंगू – बुखार मलेरिया के मुकाबले कम रहता है। इससे जोड़ों में दर्द रहेगा। शरीर में जगह-जगह चकते आ जाते हैं। शरीर में प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। दरअसल, डेंगू का वायरस शरीर में प्रवेश कर हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को नुकसान पहुंचा देता है।

बचाव के उपाय
• गड्ढों को मिट्टी से ढक दें।
• नीम के पत्ते जलाकर धुआं करें।
• पूरी आस्तीन के कपड़े पहने।
• मच्छरदानी का प्रयोग करें।
• तेल में कूपर मिलाकर दिया जलाएं।
• कूलर का पानी रोज बदलें व उसे रगड़कर साफ करें।
• छत व घर में किसी पात्र में बारिश का पानी न एकत्र होने दें।

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