प्रयागराज में श्रद्धालुओं को अक्षय वट का निकट से दर्शन कराया जा सके इस पर मंडल आयुक्त ने की चर्चा दिए निर्देश

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में प्रयागराज में आने वाले श्रद्धालुओं एवं तीर्थ यात्रियों के अक्षय वट, पातालपुरी एवं सरस्वती कूप के दर्शन को और सुगम बनाने के दृष्टिगत मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत ने आज जिलाधिकारी संजय कुमार खत्री, मेला अधिकारी/उपाध्यक्ष पीडीए, अरविंद कुमार चौहान समेत सभी संबंधित अधिकारियों के साथ तीनों स्थलों का निरीक्षण किया तथा उनके आगामी विकास हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

सर्वप्रथम अक्षय वट जाकर श्रद्धालुओं को कैसे वृक्ष के और निकट लाकर दर्शन कराया जा सके इस पर चर्चा की तथा इस संबंध में एक लेआउट तैयार करने के भी निर्देश दिए। साथ ही प्रयागराज विकास प्राधिकरण द्वारा अक्षय वट तक जाने के मार्ग का जो सुंदरीकरण कराने का कार्य प्रस्तावित है उसमें फसाद लाइटिंग, ग्रीनरी तथा साइड की दीवारों में अक्षय वट से संबंधित कहानियों एवं संदर्भों को दर्शाने को भी कहा है। श्रद्धालुओं हेतु किलाघाट की तरफ से अक्षय वट तक जाने वाले मार्ग के प्रवेश द्वार एवं उसके आसपास की जगह को भी अक्षय वट तथा पातालपुरी से संबंधित थीम से सजाने एवं विकसित करने के भी निर्देश दिए गए। इसके दृष्टिगत प्रबुद्ध लोगों की एक समिति बनाकर उनसे सुझाव लेने एवं गहन अध्ययन कराते हुए संदर्भों की एक सूची तैयार करने को भी कहा है।

इसी क्रम में पातालपरी मंदिर तक जाने वाले मार्ग का भी सुंदरीकरण कराने का प्रस्ताव दिया गया जिसमें फसाद लाइटिंग, दीवारों का जीर्णोद्धार तथा मंदिर के बाहर की जगह को पातालपुरी से संबंधित थीम से विकसित करने की बात कही गई। पातालपुरी मंदिर के अंदर भी विभिन्न देवी-देवताओं से संबंधित संदर्भों को दर्शाते हुए सुंदरीकरण का कार्य किया जाएगा। मंडलायुक्त ने सभी जगहों पर क्यूआर कोड लगाने की भी बात कही है जिससे कि श्रद्धालु उसे स्कैन कर संबंधित जगह के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।

आने वाले समय में सरस्वती कूप के दर्शन का रास्ता भी श्रद्धालुओं के लिए वर्ष पर्यंत खोलने पर विचार किया जा रहा है तथा इस संबंध में आवश्यक कार्य हेतु एक कार्य योजना तैयार करने के भी निर्देश दिए गए हैं। मंडल आयुक्त ने सभी कार्यों को अति शीघ्र शुरू कराने के दृष्टिगत उपाध्यक्ष पीडीए को जल्द से जल्द एक डीपीआर बनवाने के निर्देश दिए हैं जिससे कि संबंधित विभागों के अधिकारियों से समन्वय बनाते हुए अग्रिम अनुमोदन हेतु प्रस्ताव शासन में प्रेषित की जा सके।

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