Sunday, October 2, 2022

माफिया डॉन ब्रजेश सिंह को पिता की हत्या ने जरायम की दुनिया में धकेला, जाने माफिया डॉन ब्रजेश सिंह की पूरी कहानी

लखनऊ।बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी के सबसे बड़े दुश्मन डॉन ब्रजेश सिंह रिहाई के बाद सुर्खियों में हैं।मुख्तार अंसारी पर हमले के मामले में हाईकोर्ट से बुधवार को जमानत मिलने के बाद डाॅन ब्रजेश सिंह 14 साल बाद गुरुवार की शाम जेल से बाहर आए।अपने पिता की हत्या के बाद ब्रजेश सिंह अपराध की दुनिया में कदम रखा,लेकिन मुख्तार अंसारी से दुश्मनी एक कांस्टेबल की हत्या के बाद हुई। कांस्टेबल की हत्या के बाद डॉन ब्रजेश सिंह और माफिया मुख्तार अंसारी एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए।2000 में कई सालों तक फरार रहे बृजेश सिंह पर पुलिस ने 5 लाख रुपए का इनाम भी घोषित किया था।

1884 में पिता के हत्यारों की सनसनीखेज तरीके से हत्या का आरोप ब्रजेश सिंह पर लगा।इसके बाद ब्रजेश सिंह की अपराध की दुनिया में तूती बोलने लगी थी।मुख्तार अंसारी और ब्रजेश सिंह पूर्वांचल समेत उत्तर प्रदेश में बादशाह बनाने के लिए गैंग का विस्तार किया।इसी बीच ब्रजेश सिंह की मुलाकात गाजीपुर जिले के मुडियार गांव के दूसरे माफिया त्रिभुवन सिंह से हुई। ब्रजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह ने पूर्वांचल का बादशाह बनने की ठान ली। 1988 में त्रिभुवन के हेड कांस्टेबल भाई राजेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। कांस्टेबल की हत्या में साधु सिंह और मुख्तार अंसारी का नाम आया।कांस्टेबल की हत्या के पहले तक ब्रजेश सिंह और मुख्तार अंसारी गैंग के बीच कोई खास दुश्मनी नहीं थी, लेकिन कांस्टेबल की हत्या के बाद दोनों एक-दूसरे के सबसे बड़े दुश्मन बन गए।

कांस्टेबल की हत्या के आरोपी साधु सिंह के पूरे परिवार की हत्या

कांस्टेबल राजेंद्र सिंह की हत्या के बाद साधु सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।जब साधु सिंह जेल में था तभी वो पिता बना।साधु सिंह अपनी पत्नी और बच्चे को देखने के लिए अस्पताल आया।आरोप है कि साधु सिंह के आने की खबर ब्रजेश सिंह को लग गई।पुलिस की वर्दी पहने व्यक्ति ने साधु सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी।पुलिस ने बताया कि ये हत्या ब्रजेश ने की थी। दोपहर में हुई इस हत्या के 6 घंटे बाद खबर आई कि साधु सिंह की मां-भाई समेत परिवार के 8 लोगों की मुदियार गांव में हत्या कर दी गई। हालांकि इस हत्याकांड का बदला मुख्तार अंसारी गैंग ने कई हत्याओं से लिया था।

छोटा राजन तक पहुंचे ब्रजेश

साधु सिंह के परिवार की हत्या के बाद ब्रजेश सिंह का नाम अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बनने की तरफ तेजी से बढ़ा। आरोप है कि 1992 में ब्रजेश सिंह ने गुजरात में रघुनाथ यादव नाम के एक व्यक्ति को गोली मार दी। जब सब-इंस्पेक्टर झाला ने पकड़ने की कोशिश की तो उन्हें भी गोली मार दी गई। पुलिस का कहना है कि झाला को गोली मारने वाले भी ब्रजेश सिंह ही थे।ब्रजेश सिंह को लेकर जो खौफ का माहौल बना उसी के बलबूते पूर्वांचल के जिलों से निकलकर झारखंड तक पहुंच गए।ब्रजेश सिंह छोटा राजन के सबसे खास अंडरवर्ल्ड डॉन सुभाष ठाकुर से जा मिले।झारखंड के कोल माफिया सूरजदेव सिंह से ब्रजेश सिंह की नजदीकी बढ़ी,बिहार के सूरजभान के खास हो गए। यहां से ब्रजेश सिंह ने पैसा बनाना शुरू किया।तभी अचानक मुंबई में आतंकी हमला होता है, दाऊद और सुभाष ठाकुर अलग हो जाते हैं। इसके बाद सुभाष ठाकुर ब्रजेश सिंह के साथ हो गए।

पूर्वांचल में बादशाह बनने के बीच मुख्तार बने रोड़ा

अब ब्रजेश सिंह के पास पैसा भी था और पावर भी,लेकिन राजनीतिक रूप से मजबूत नहीं बन पाए थे।वहीं दूसरी तरफ साधु सिंह की हत्या के बाद मुख्तार अंसारी राजनीति में आकर विधायक बन चुके थे।पुलिस मुख्तार अंसारी के इशारे पर चलती और ब्रजेश सिंह को परेशान करती। इसके बाद ब्रजेश सिंह के लोगों पर हमला होने लगा। इससे कई लोगों की मौत हो गई।आरोप है कि बादशाह बनने की चाहत में ही ब्रजेश सिंह गैंग ने तय किया कि अब मुख्तार अंसारी को रास्ते से हटाना पड़ेगा।

जुलाई 2001 में मुख्तार अंसारी के गाजीपुर में काफिले के साथ जाने की खबर मिली।ब्रजेश सिंह गैंग का एक ट्रक मुख्तार अंसारी के काफिले के आगे और दूसरी कार काफिले के पीछे चल रही थी। गाजीपुर के उसरी चट्टी के पास रेलवे का फाटक बंद हो गया तो कार पीछे ही रह गई। तभी अचानक ट्रक रुका और दो हथियार बंद बदमाश मुख्तार अंसारी के काफिले पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने लगे। ऐसे में मुख्तार अंसारी गाड़ी से कूदकर फायरिंग करते हुए खेतों की तरफ भागे। तब तक इधर उनके गनर समेत तीन लोग मार दिए गए। बताया जाता है कि मुख्तार अंसारी ने दोनों बदमाशों को अपने निशाने से ढेर कर दिया और एक गोली ब्रजेश सिंह को भी लगी थी।ब्रजेश सिंह समझ गए थे कि अब मुख्तार अंसारी बड़ा हमला करेंगे।

विधायक कृष्णानंद राय का साथ लिया

अब ब्रजेश समझ गए थे कि बिना राजनीतिक मदद मुख्तार अंसारी को नहीं हराया जा सकता। इसलिए ब्रजेश सिंह ने कृष्णानंद राय का साथ पकड़ा। मुख्तार अंसारी गैंग को ब्रजेश सिंह का बढ़ना अब किसी भी हालत में मंजूर नहीं था। ब्रजेश सिंह से पहले कृष्णानंद राय को ही रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रची गई। यह एक ऐसी साजिश थी जिसने उत्तर प्रदेश में उस समय की सबसे क्रूर गैंगवार कराई थी। 2005 में कृष्णानंद राय के काफिले को घेरकर लगभग 500 राउंड फायरिंग हुई। कृष्णानंद राय सहित सभी 7 लोग मार दिए गए। पोस्टमार्टम हुआ तो इन सभी की बॉडी से 67 गोलियां निकली। सभी फायरिंग AK-47 से हुई थी।

तीन साल लापता फिर भुवनेश्वर से गिरफ्तार

इस घटना के बाद से ब्रजेश सिंह लापता हो गए।ब्रजेश सिंह के मारे जाने की भी अफवाह उड़ी, लेकिन पुलिस को इस पर भरोसा नहीं था। हैरानी की बात ये थी कि पुलिस के पास ब्रजेश सिंह की कोई फोटो भी नहीं थी। एक फोटो थी तो वो पुरानी थी।ब्रजेश सिंह को पकड़ना बेहद मुश्किल था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को तीन साल बाद इस काम में कामयाबी मिल गई। 2008 में पुलिस ने उड़ीसा के भुवनेश्वर से ब्रजेश सिंह को गिरफ्तार कर लिया।ब्रजेश सिंह भुवनेश्वर में अरुण कुमार नाम से रह रहे थे।कहा जाता है कि ये गिरफ्तारी प्रायोजित थी। तीन सालों में ब्रजेश सिंह ने अंडरग्राउड होते हुए भी खुद को मजबूत कर लिया था। अब उन्हें पूर्वांचल में रहना था और मुख्तार गैंग का खात्मा करना था।

ब्रजेश के जेल में आते ही पूर्वांचल में हत्याओं का दौर

ब्रजेश सिंह के जिंदा होने की खबर मिलने और जेल में आने के बाद हत्याओं का दौर शुरू हो गया।दोनों गैंग में शामिल बदमाशों के बीच गैंगवार तेज हो गया। वाराणसी से लेकर गाजीपुर मऊ, जौनपुर और अन्य जिलों में गोलियां तड़तड़ाने लगीं। ब्रजेश सिंह के खास जिला पंचायत सदस्य अजय खलनायक की गाड़ी को निशाना बनाकर गोलियां दागी गईं, गाड़ी में पत्नी भी साथ थी। तीन गोली अजय और एक गोली पत्नी को लगी, हालांकि दोनों बच गए। ठीक दो महीने बाद 3 जुलाई को ब्रजेश सिंह के चचेरे भाई सतीश सिंह को सरेआम गोलियों से भून दिया गया।

ब्रजेश ने भी राजनीति में रखा कदम

मुख्तार अंसारी की राजनीति में रसूख को देखते हुए ब्रजेश सिंह ने भी कई राजनेताओं से संबंध बनाए। 2012 में खुद भी चंदौली की सैयदराजा सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन सपा की लहर में सपा प्रत्याशी मनोज सिंह से हार गए। ब्रजेश सिंह ने 2016 में वाराणसी सीट से MLC के लिए दावा ठोंका। ब्रजेश सिंह से मुकाबले के लिए मनोज सिंह की बहन मीना सिंह मैदान में आईं। ब्रजेश सिंह ने मीना को हरा कर मनोज से बदला ले लिया।

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